#Rajasthan में 01.04.2004 के बाद नियुक्त कार्मिकों के लिए #GPF कटौती के आदेश जारी : जानिये GPF के बारे में संपूर्ण जानकारी

#Rajasthan में 01.04.2004 के बाद नियुक्त कार्मिकों के लिए #GPF कटौती के आदेश जारी : जानिये GPF के बारे में संपूर्ण जानकारी

GPF me adhikatam katauti kitni hogi. GPF me katautee ke fayde. GPF ki byaaj rate.

क्या है GPF ?


GPF की फुल फॉर्म है - General Provident Fund यानि कि सामान्य प्रावधायी निधि | यह एक ऐसी निधि है जो समस्त कार्मिकों के लिए अनिवार्य कर दी गयी है | इसकी मूल प्रवृत्ति कर्मचारियों में बचत की आदत विक्सित करने के संबंध में है | आधिकारिक परिभाषा के अनुसार - "सामान्य प्रावधायी निधि योजना से अभिप्राय इन नियमों में वर्णित सामान्य प्रावधायी निधि योजना से है जिनमें सामान्य प्रावधायी निधि-2004 (जीपीएफ - 2004) एवं सामान्य प्रावधायी निधि सैब (जीपीएफ -सैब) भी सम्मिलित है। सामान्य प्रावधायी निधि - 2004 (जीपीएफ-2004 ) " से अभिप्राय इन नियमों में वर्णित दिनांक 1–1–2004 एवं इसके पश्चात् नियुक्त कर्मचारियों पर लागू सामान्य प्रावधायी निधि के योजना के प्रावधानों से है जब तक कि अन्यथा कोई प्रावधान नहीं किया जाये ।"

GPF में परिवार किसे माना है ?

राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे RGHS - Rajasthan Government Health Scheme आदि में परिवार की परिभाषा अलग-अलग होती है | GPF की आधिकारिक परिभाषा के अनुसार - " परिवार" से अभिप्रायः---

(i) "पुरुष अभिदाता" के मामले में पत्नी अथवा पत्नियां, माता-पिता, बच्चे, अवयस्क भाई, अविवाहित बहिनें, मृत पुत्र की विधवा एवं बच्चे और अगर अभिदाता के माता पिता जीवित नही है तो दादा-दादी । परन्तु अगर अभिदाता यह सिद्ध कर दे कि उसकी पत्नी न्यायिक रुप से उससे पृथक कर दी गई है या जिस समुदाय से वह सम्बंधित है, उस की रुढिजन्य विधि के अधीन वह भरण पोषण की हकदार नही रही है तो वह नियमों के अन्तर्गत परिवार की सदस्य तब तक नहीं मानी जायेगी जब तक कि अभिदाता बाद में निदेशक को इस सम्बंध में सदस्य माने जाने के लिए लिखित में सूचित नहीं कर देता है।

(ii) "महिला अभिदाता" के मामले में पति, माता-पिता, बच्चे, अवयस्क भाई, अविवाहित बहिनें, मृत पुत्र की विधवा एवं बच्चे और जहा पर माता पिता

जीवित नहीं है तो दादा-दादी । परन्तु यदि अभिदाता द्वारा निदेशक को लिखित में अपने पति को परिवार अपवर्जित करने की इच्छा अभिव्यक्त की जाती तो पति इन नियमों के संदर्भ में अभिदाता के परिवार का सदस्य तब तक नहीं माना जायेगा जब तक कि अभिदाता बाद में ऐसी सूचना को लिखित में निरस्त नहीं कर दें ।

नाम निर्देशन (Nomination) :

GPF निधि में सम्मिलित होते समय अभिदाता एक अथवा अधिक व्यक्तियों के पक्ष में एसआईपीएफ पोर्टल पर निर्धारित फील्ड में ऑनलाईन नाम निर्देशन करेगा, जिसे उसके खाते में जमा रकम के संदेय होने से पूर्व या जहां रकम संदेय हो गई हो तो उसके भुगतान होने से पूर्व अभिदाता की मृत्यु होने की दशा में निधि में जमा रकम प्राप्त करने का अधिकार होगा। परन्तु यदि अभिदाता अवयस्क हो तो उसके वयस्क होने पर ही नाम निर्देशन किया जाना आवश्यक होगा। परन्तु नाम निर्देशन पंजीकृत कराते समय अभिदाता का परिवार होने की स्थिति में वह परिवार के सदस्य / सदस्यों के पक्ष में ही नाम निर्देशन कर सकेगा।

परन्तु यह भी कि, निधि में सम्मिलित होने से पूर्व किसी अन्य प्रावधायी निधि में संदाय करने वाले अभिदाता द्वारा उस निधि में पंजीकृत करवाया गया नाम निर्देशन, यदि उस निधि में जमा राशि इस निधि में अन्तरित कर दी गई है, तो इन नियमों को अंतर्गत जब तक वह नया नाम निर्देशन नहीं करता, इन नियमों में किया हुआ माना जायेगा ।

अभिदाता द्वारा विवाह पूर्व किसी भी व्यक्ति के पक्ष में किया गया नाम निर्देशन विवाह पश्चात् नया मनोनयन नहीं करने की स्थिति में उसके पत्नि / पति के पक्ष में स्वतः ही किया हुआ समझा जायेगा।

(2) यदि अभिदाता उप नियम (1) के अन्तर्गत एक से अधिक व्यक्तियों का नाम निर्देशित करता है तो मनोनयन में प्रत्येक मनोनीत को प्राप्त होने वाली राशि या उसके भाग को इस प्रकार निर्दिष्ट करेगा कि निधि में किसी भी समय जमा उसकी सम्पूर्ण राशि इसके अन्तर्गत समाहित हो जाये ।

(3) अभिदाता किसी भी समय पूर्व में किये गये नाम निर्देशन को निरस्त कर प्रावधानों के अनुरूप ऑनलाईन नया नाम निर्देशन कर सकेगा।

(4) अभिदाता नाम निर्देशन में प्रावधान कर सकता है कि :

(i) किसी विनिर्दिष्ट मनोनयन के संदर्भ में मनोनीत की अभिदाता से पूर्व मृत्यु हो जाने की स्थिति में, उस मनोनीत के अधिकार मनोनयन प्रपत्र में निर्दिष्ट किये गए अन्य व्यक्ति / व्यक्तियों को हस्तान्तरित होंगे परन्तु यदि अभिदाता के परिवार में अन्य सदस्य है तो ऐसा मनोनयन परिवार के सदस्य / सदस्यों के लिए ही मान्य होगा । इस खण्ड के अन्तर्गत यदि अभिदाता ऐसा अधिकार एक से अधिक व्यक्तियों को प्रदान करता है तो वह ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को प्राप्त होने वाली राशि / भाग का निर्धारण इस प्रकार करेगा कि पूर्व में मनोनीत को प्राप्त होने वाली सम्पूर्ण राशि / भाग इसके अन्तर्गत समाहित हो जायें।

(ii) मनोनयन मे किसी निर्दिष्ट आकस्मिक घटना के घटित होने की स्थिति में मनोनयन अवैध हो जायेगा ।

परन्तु मनोनयन पंजीकृत कराते समय यदि अभिदाता के परिवार में केवल एक ही सदस्य है तो वह मनोनयन में प्रावधान करेगा कि खण्ड (i) में वैकल्पिक मनोनीत को प्रदत्त अधिकार रिवार के अन्य सदस्य / सदस्यों के परिवार में शामिल हो जाने पर अमान्य हो जायेंगे।

(5) ऐसे मनोनीत की मृत्यु की दशा में, जिसमें मनोनयन में कोई विशेष प्रावधान नहीं किया गया हो या किसी घटना के घटित होने पर मनोनयन अमान्य हो जाता है, इन नियमों के प्रावधानों के अन्तर्गत पुराना मनोनयन निरस्त करते हुए नया मनोनयन दर्ज करेगा। (6) अभिदाता द्वारा किये गये मनोनयन एवं निरस्तीकरण ऑनलाइन मनोनयन एवं निरस्तीकरण के प्राप्त होने की तिथि से प्रभावी होगें ।

(7) मनोनीत पर खातेदार की हत्या अथवा हत्या के लिए प्रेरित करने का आरोप होने पर जीपीएफ खाते में जमा राशि का भुगतान न्यायालय का निर्णय होने तक लम्बित रखा जायेगा। न्यायालय का निर्णय होने पर यदि मनोनीत पर हत्या अथवा हत्या के लिए प्रेरित करने का आरोप सिद्ध होता है तो जीपीएफ खाते में जमा राशि का तान परिवार के अन्य सदस्यों को किया जायेगा। मनोनीत निर्देशिती पर हत्या अथवा हत्या के लिए प्रेरित करने का आरोप सिद्ध नहीं होता है एवं सरकार आगे अपील में नहीं जाने का निर्णय लेती है तो जीपीएफ खाते में जमा राशि का भुगतान मनोनीत को किया जायेगा ।

अभिदाता द्वारा प्रथम जमा First Deposite in GPF :

(1) सामान्य प्रावधायी निधि- 2004 एवं सामान्य प्रावधायी निधि- सैब के अन्तर्गत आने वाले कार्मिक स्वैच्छिक अभिदान का विकल्प चुन कर प्रथम कटौती करा सकेंगे।

(2) यदि ये कार्मिक स्वैच्छिक अभिदान का विकल्प चुनते हैं तो भविष्य में अनिवार्य अभिदान किया जाना आवश्यक होगा।

(3) यदि ये कार्मिक स्वैच्छिक अभिदान का विकल्प नहीं चुनते हैं तो राज्य सरकार के आदेशों के अनुरूप जो कटौती की जायेगी वह इन कार्मिकों हेतु प्रथम कटौती होगी।

Rates prescribed by the Government from March, 2018 (Effective till Date) 

मार्च 2018 से राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दरें जो आज तक लागू है -


Sl. No.Pay drawn in Pay MatrixRate of Subscription in Rs.
1Upto Rs. 23100/-1,450.00
2Rs. 23101/- to 28500/-1,625.00
3Rs. 28501/- to 38500/-2,100.00
4Rs. 38501/- to 51500/-2,850.00
5Rs. 51501/- to 62000/-3,575.00
6Rs. 62001/- to 72000/-4,200.00
7Rs. 72001/- to 80000/-4,800.00
8Rs. 80001/- to 116000/-6,150.00
9Rs. 116001/- to 167000/-8,900.00
10167001/- and Above10,500.00

जमाकर्ता द्वारा GPF खाते में अधिकतम जमा हेतु विकल्प राशि :

यदि कार्मिक द्वारा अपने DDO को इस संबंध में कोई भी प्रार्थना पत्र अथवा ऑनलाइन फॉर्म प्रस्तुत नहीं किया जाता है तो आहरण-वितरण अधिकारी द्वारा उपरोक्त सारणी के अनुसार कार्मिक की मूल वेतन राशि के सम्मुख अंकित स्लैब राशि के अनुसार प्रथम कटौती की जायेगी | तथा बाद में भी इसी राशि की कटौती की जाती रहेगी जब तक कि या तो राज्य सरकार अधिसूचना जारी कर स्लैब राशि में परिवर्तन कर दे अथवा कार्मिक स्वयं अधिक राशि की कटौती हेतु विकल्प पत्र प्रस्तुत कर दे |

हालांकि SI - State Insurance में अधिकतम राशि के जमा के मामले में सीधे निर्देश हैं कि कार्मिक की स्लैब से दो अधिक स्लैब की कटौती की जा सकती है | किन्तु GPF - General Provident Fund की कटौती के मामले में ऐसे कोई स्पष्ट निर्देश प्रदान नहीं किये गए हैं, और न ही इसकी कोई अधिकतम सीमा है | परन्तु SIPF ने अपने विस्तृत दिशा-निर्देशों के माध्यम से इस बारे में कुछ प्रावधान अवश्य ही उपलब्ध करवाए हैं | जिनके माध्यम से हम किसी भी कार्मिक की GPF में अधिकतम स्वैच्छिक कटौती की गणना कर सकते हैं |

सामान्य प्रावधायी निधि - 2004 के अंतर्गत अभिदान करने वाले अंशदाता इस योजना में अभिदान हेतु विकल्प चुनते हैं तो वे कार्यालयध्यक्ष को ऑन लाइन एडवाइज़ प्रस्तुत करेंगे एवं कार्यालयध्यक्ष / आहरण वितरण अधिकारी संबंधित अभिदाता के वेतन से निर्धारित दर से मासिक अभिदाय की कटौती Integrated Financial Management System (IFMS) की निर्धारित प्रकियानुसार वेतन / चालान से किया जाना सुनिश्चित करेंगे। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार के आदेशों से जमा राशि एवं अभिदाता द्वारा स्वयं के विकल्प के अनुसार जमा कराने हेतु प्रस्तावित राशि अभिदाता द्वारा जमा कराई जा सकेगी। यह राशि वर्ष के दौरान उसकी कुल वार्षिक परिलब्धियों में से उपरोक्त वर्णित राशि एवं अन्य अनिवार्य कटौतियों को कम करने के पश्चात शेष राशि की सीमा तक होगी।
आइए जानते हैं उपरोक्त परिभाषा के अनुसार किसी कार्मिक द्वारा की जाने वाली अधिकतम कटौती  ==>
उक्त परिभाषा के अनुसार अधिकतम कटौती की सीमा कार्मिक की Basic Salary के अनुसार की जायेगी | मान लीजिए किसी कार्मिक का मूल वेतन 35,800 है तथा कार्मिक की SI कटौती 5,000 ; LIC कटौती 1200 ; PLI कटौती 1720 ; तथा लोन की राशि 15,700 ; तथा कार्मिक की GPF स्लैब राशि 2,100 है तो उक्तानुसार समस्त कटौतियों को कम करने के पश्चात् (35,800 - 25,720)  कार्मिक की शेष राशि 10,080 मासिक है | एवं उक्त कार्मिक की वार्षिक परिलब्धि 10,080 X 12 = 1,20,960 रुपये है | अत: उक्त कार्मिक निम्नांकित सारणी में क्रम संख्या 9 में ठहरता है | अर्थात् कार्मिक अपनी GPF निधि में अधिकतम 8,900 रुपये मासिक की कटौती करवा सकता है |

नोट : HRA - House Rent Allowance तथा DA - Dearness Allowance को वार्षिक परिलब्धियों में न तो वर्णित किया जाना है और न ही इसकी गणना की जानी है |

GPF पर दिए जाने वाले ब्याज के बारे में स्पष्टीकरण :

आइए कुछ बिन्दुओं के माध्यम से GPF निधि में ब्याज से संबंधित कुछ तथ्यों को समझते हैं -
( 1 ) ब्याज कब जमा किया जाता है ?
(i) वित्तीय वर्ष के प्रारम्भ में प्रारम्भिक शेष पर अप्रेल माह में अभिदाता के खाते में ब्याज जमा किया जायेगा । वित्तीय वर्ष के दौरान की गई जमाओं के लिये जिस माह में राशि जमा की गई है उसकी ब्याज की गणना मासिक गुणन के आधार पर आगामी माह में की जाकर अभिदाता के खाते में ब्याज जमा किया जायेगा । ब्याज की गणना करते समय आहरण को आहरित करने के माह में समायोजित किया जायेगा ।
(ii) नियम 11 के प्रावधानों के अनुसार खाते में कटौती होना बंद हो जाने पर विभाग द्वारा भुगतान आदेश जारी करने के पूर्ववर्ती माह तक के ब्याज का भुगतान किया जायेगा ।

( 2 ) ब्याज की दर:- ब्याज की दर समय समय पर राज्य सरकार द्वारा जारी आदेशों के अनुसार निर्धारित की जायेगी।

( 3 ) सभी प्रकार की जमा राशि एवं आहरण राशि पर जमा / आहरण माह से ब्याज की गणना की जायेगी। परन्तु इन नियमों के नियम 10 ( 2 ) के अन्तर्गत राज्य सरकार के आदेशों द्वारा मंहगाई भत्ते की जमा होने योग्य राशि पर ब्याज की गणना मंहगाई भत्ते के आदेश प्रसारित किये जाने के माह से की जायेगी ।

अभिदाता के सेवानिवृत्त अथवा सेवामुक्त होने पर खाता बंद होने की प्रक्रिया - 

(1) अभिदाता के खाते में जमा राशि का मय ब्याज भुगतान हो जाने पर अभिदाता का खाता बंद कर दिया जायेगा ।

(2) निदेशक खाता बंद किये जाने वाले वर्ष के दौरान लिये गये आहरण को कम करते हुए अभिदाता के खाते में जमा राशि पर भुगतान करने के पूर्व माह तक के ब्याज सहित जमा राशि का भुगतान करेगा।

(3) दिनांक 1-4-2012 से पूर्व की लुप्त कटौतियों को कार्यालयाध्यक्ष / आहरण वितरण अधिकारी द्वारा प्रमाणित पासबुक में इन्द्राज अथवा GA 55A के माध्यम से अंतिम साक्ष्य माना जाकर पूर्ण किया जायेगा। इस हेतु प्रमाणित पासबुक अथवा GA 55A की स्केन्ड कॉपी ऑन लाईन एसआईपीएफ पोर्टल पर अपलोड की जा सकेगी।

(4) केवल मृत्यु के मामलों को छोड़कर अन्य समस्त मामलों में भुगतान अभिदाता को किया जावेगा। अभिदाता की मृत्यु की स्थिति में भुगतान नियम 16 के अनुरूप किया जायेगा ।

(5) अंतिम भुगतान प्राप्त करने हेतु अभिदाता ऑनलाईन क्लेम रिक्वेस्ट के साथ undertaking हेतु निर्धारित चैक बॉक्स में सहमति प्रस्तुत करेगा जिसके अनुसार निधि से अधिक भुगतान होना पाये जाने पर राशि जीपीएफ की तत्समय प्रचलित ब्याज दर सहित एक मुश्त लौटाने हेतु बाध्य होगा।

अभिदाता की मृत्यु पर प्रक्रिया - 

( 1 ) अभिदाता द्वारा अपने पीछे परिवार छोडने की दशा में :--


(i) यदि अभिदाता द्वारा नियम 5 के या इससे पूर्व प्रवृत तदनुरूपी नियम के उपबन्धों के अनुसार अपने परिवार के सदस्य या सदस्यों के पक्ष में किया गया नाम निर्देशन अस्तित्व में है, तो निधि में अभिदाता के खाते में जमा रकम या उसका कोई अंश, जो नाम निर्देशन से सम्बंधित है, नाम निर्देशन में विनिर्दिष्ट अनुपात में उसके नाम निर्देशित या नाम निर्देशितियों को संदेय हो जायेगा ।

(ii) यदि अभिदाता के परिवार के सदस्य या सदस्यों के पक्ष में कोई नाम निर्देशन अस्तित्व में नहीं है, या यदि ऐसा नाम निर्देशन निधि में उसके खाते में जमा रकम के एक अंश से ही सम्बंधित है, तो सम्पूर्ण रकम या उसका अंश, जो नाम निर्देशन से सम्बंधित नही है, जैसी भी स्थिति हो, उसके परिवार के सदस्य या सदस्यों से भिन्न किसी व्यक्ति या व्यक्तियों के पक्ष में किये जाने हेतु तात्पर्यित किसी नाम निर्देशन के होते हुए भी उसके परिवार के तत्समय जीवित सदस्यों को समान अंशों में संदेय हो जायेगा तथापि यदि कोई विवाद हो और विभाग वारिसों के बारे में विनिश्चिय करने की स्थिति में नहीं हो तो दावे के संदाय हेतु एसआईपीएफ पोर्टल पर ऑनलाईन क्लेम रिक्वेस्ट सबमिट की जायेगी और जांच उपरान्त पात्र होने पर उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने वाले व्यक्ति / व्यक्तियों को दावे का संदाय किया जायेगा।

(2) अभिदाता द्वारा अपने पीछे परिवार न छोड़ने की दशा में


(i) यदि नियम 5 के या इससे पूर्व प्रवृत्त तदनरूपी नियम के उपबन्धों के अनुसरण में किसी व्यक्ति या किन्हीं व्यक्तियों के पक्ष में अभिदाता द्वारा किया गया नाम निर्देशन अस्तित्व में हो तो निधि में अभिदाता के खाते में जमा रकम या उसका कोई अंश, जो नाम निर्देशन से सम्बंधित है, नाम निर्देशिति या नाम निर्देशितियों को नाम निर्देशन में विनिर्दिष्ट अनुपात में संदेय हो जावेगा। r

(ii) अभिदाता के लापता होने पर खातेदार के विभाग द्वारा जारी सेवामुक्ति आदेश अथवा न्यायालय द्वारा मृतक घोषित किये जाने के आदेश प्राप्त होने पर जीपीएफ में जमा राशि का भुगतान किया जायेगा ।

(iii) अभिदाता के खाते में जमा रकम के संदेय होने से पूर्व या जहां रकम संदेय हो गई है तो, संदाय होने से पूर्व अभिदाता की मृत्यु हो जाने पर वैध मनोनीत / दावेदार की ओर से प्रमाणिक दस्तावेजों के आधार पर एसआईपीएफ पोर्टल पर ऑनलाईन क्लेम रिक्वेस्ट सबमिट की जायेगी और जांच उपरान्त पात्र होने पर संबंधित व्यक्ति / व्यक्तियों को दावे का संदाय किया जायेगा।

(iv) अभिदाता की मृत्यु होने पर अंतिम भुगतान हेतु मनोनीत / दावेदार ऑनलाईन क्लेम रिक्वेस्ट के साथ ऑन लाईन undertaking हेतु निर्धारित चैक बॉक्स में सहमति प्रस्तुत करेगा, जिसमें अंतिम भुगतान प्राप्त करने हेतु जिसके अनुसार निधि से अधिक भुगतान होना पाये जाने पर राशि जीपीएफ की तत्समय प्रचलित ब्याज दर सहित एक मुश्त लौटाने हेतु बाध्य होगा।

विशेष सूचना : यद्यपि उक्त पोस्ट "राजस्थान सरकार वित्त (बीमा) विभाग के पत्र क्रमांक : प 4(1) वित्त / बीमा / 2021 / 3628 दिनांक : 21 Oct 2021" के परिप्रेक्ष्य में लिखी गयी है लेकिन किसी भी नतीजे पर पहुँचने से पहले कार्मिक एवं आहरण वितरण अधिकारी किसी कुशल लेखाकार अथवा अपने नजदीकी SIPF कार्यालय से अवश्यमेव संपर्क कर लें |


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