परिवीक्षा काल में विभिन्न प्रकार के अवकाश के संबंध में जानकारी

परिवीक्षा काल में विभिन्न प्रकार के अवकाश के संबंध में जानकारी

Various leaves in probation period - परिवीक्षा काल में Leaves के संबंध में

प्यारे मित्रों !
परिवीक्षा काल के साथियों को सीएल के संबंध में लेकर कई चिंताएं और जिज्ञासाएं होती है आपकी सहायतार्थ हम कुछ बिंदु आपके ध्यान में लाना चाहेंगे जो कि निम्नानुसार है -
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नोट : यह जानकारी अधिकारिक नहीं है आप अपने उच्च स्तर के अधिकारियों से संपर्क करके ही उचित निर्णय लें ।
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👉 जॉइनिंग करने के बाद 1 महीने तक सेवा में रहने के बाद 1.25 सीएल अर्जित होती है जिसे महीना समाप्त होने के बाद ही लिया जा सकता है।
👉 3 महीने तक सेवा देने पर 5cl अर्जित होती है
👉 6 महीने तक सेवा देने पर 10 सीएल अर्जित होती है एवं इसके बाद पूरी 15 सीएल
👉 1 वर्ष में अधिकतम सीएल की संख्या 15 होती है।
👉 सीएल अर्जित करने, प्रदान करने आदि के नियम समय-समय पर बदलते रहते हैं

आइए सीएल के बारे में समझते हैं :

यदि महाशय 1 को जॉइनिंग के 10 दिन बाद ही किसी कारण से अवकाश की आवश्यकता है तो उन्हें अवैतनिक अवकाश लेना होगा।
 यदि संस्था प्रधान अथवा पीईईओ आपको सीएल दे दे देते हैं और आपका पूरा वेतन बना देते हैैं तो आपको 1 महीने के भीतर लिए गए अवकाश के एवज में आपकी पर डे सैलरी (NPS सहित) का चालान बनवाकर राजकोष में जमा करवाना होगा।
महाशय 2 को सेवा में एक महीना पूरा हो गया है एवं अब उन्हें अवकाश की आवश्यकता है । उनकी अर्जित सवा सीएल में से वे केवल एक सीएल ही ले सकते हैं। इससे ज्यादा अवकाश की आवश्यकता है तो उन्हें अवैतनिक अवकाश स्वीकृत करवाना चाहिए।
यदि किसी कारणवश उन्हें अवकाश का लाभ दे दिया जाता है तो नियमानुसार सीएल को छोड़कर अन्य दिनों के वेतन का चालान बनवा कर पुनः राजकोष में जमा करवाना होगा।

महाशय 3 को सेवा में आए हुए सिर्फ तीन ही दिन हुए हैं और अब उन्हें पुत्र / पुत्री की प्राप्ति हुई है अतः उन्हें पितृत्व अवकाश की आवश्यकता है तो उन्हें नियमानुसार 15 दिवस का पितृत्व अवकाश देय होगा जिसका इंद्राज उनकी सर्विस बुक में किया जाएगा । इसके लिए पितृत्व अवकाश को छोड़कर अन्य किसी भी अवकाश को कम नहीं किया जाएगा। पितृत्व अवकाश सेवाकाल में अधिकतम दो बार दिया जा सकता है। यदि पहले से एक संतान है तो यह एक बार ही देय होगा।

महाशया 4 को परिवीक्षा काल में किसी कारणवश 6 माह या उससे अधिक का गर्भ स्त्राव हुआ है तो उन्हें नियमानुसार अधिकतम 42 दिवस का गर्भ स्त्राव अवकाश दिया जाएगा। यह अवकाश उनके परिवीक्षा काल के 90 दिवस के असाधारण अवकाश में से होगा।

महाशया 5 को परिवीक्षा काल में संतान प्राप्ति हुई है इस स्थिति में उन्हें नियमानुसार मातृत्व अवकाश देय होगा।


महाशया 6 को संतान प्राप्ति हुए 2 माह हो गए हैं और अब उनका पदस्थापन हुआ है उन्हें मातृत्व अवकाश की आवश्यकता है ऐसी स्थिति में उन्हें अपने प्रार्थना पत्र के साथ सक्षम स्तर से संपर्क करना चाहिए इस संबंध में निर्णय का अधिकार सक्षम स्तर को ही होता है। यही स्थिति पुरुष अभ्यर्थी के लिए पितृत्व अवकाश पर भी लागू होती है।

परिवीक्षा काल में सीएल, पितृत्व एवं मातृत्व अवकाश आदि को छोड़कर अन्य सभी अवकाश असाधारण अवकाश ही होंगे।

महाशय 7 को परिवीक्षा काल में सीएल अर्जित नहीं होने पर भी इसका लाभ दिया गया किंतु अब उनके स्थायीकरण का समय है तो उन्हें ली गई अनुचित सी एल का वेतन चालान के माध्यम से राजकोष में जमा करवाना चाहिए।

महाशय 8 को सीएल का अनुचित लाभ दिया गया। उनका स्थायीकरण भी हो गया और ऑडिट से पहले ही उनका स्थानांतरण प्रमोशन हो गया आज उनके विद्यालय में ऑडिट टीम आई है जो उनके सेवा पुस्तिका को जांच रही है। और यह पाया गया कि उनको अनुचित सीएल का लाभ मिला है। अब उन्हें सीएल का अवैतनिक अवकाश स्वीकृत कराने के लिए अपने भूतपूर्व विद्यालय के वर्तमान डीडीओ से संपर्क करना होगा ।

महाशय 9 को अनुचित सीएल का लाभ मिला। उन्होंने अपना सेवाकाल पूर्ण कर लिया तब तक किसी भी डीडीओ / ऑडिट टीम के संज्ञान में यह मामला नहीं आया । अब महाशय जी की सेवानिवृत्ति है। ऐसे में उनकी सेवा पुस्तिका ब्लॉक स्तर के कार्यालय में जांच के लिए भेजी जाएगी । अब यहां उनकी सेवा पुस्तिका का गहनता से अध्ययन होगा। उपरोक्त मामले का असाधारण अवकाश उनके तत्कालीन (जहां सेवारत रहते हुए उन्होंने यह अवकाश लिया था वहां से) DDO से स्वीकृत कराया जाएगा अथवा अनुचित सीएल के दिन से उनके वेतन का नियमानुसार ब्याज सहित वसूल किया जाएगा अथवा जितने दिन का अनुचित सीएल लाभ मिला उतनी पीएल उनके खाते से काट ली जाएगी उपरोक्त निर्णय उनकी ऑडिट टीम / जांच समिति का होगा ।

कृपया फिर से ध्यान दीजिए कि अवकाश के नियम समय-समय पर संशोधित होते रहते हैं, अतः अधिक जानकारी के लिए अपने उच्च स्तर के अधिकारियों से संपर्क करें।
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